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President's Message

संतोष सर्राफ
राष्ट्रीय अध्यक्ष

आज से आठ दषकों से भी अधिक समय पूर्व 1935 में स्थापित, राजस्थान, हरियाणा एवं मालवा की पृश्ठभूमि से सम्बद्ध प्रवासी मारवाड़ी समाज की एकमात्र राश्ट्रीय प्रतिनिधि संस्था अखिल भारतवर्शीय मारवाड़ी सम्मेलन के राश्ट्रीय अध्यक्ष के पद हेतु सर्वसम्मति से निर्वाचित कर आप सबने मेरे उपर जो विश्वास व्यक्त किया है, उसके लिए मैं अपनी विनम्र कृतज्ञता निवेदित करता हूँ!

सम्मेलन की इस दीर्घ यात्रा में कई महत्वपूर्ण मुकाम आये हैं। स्वतंत्रता-पूर्व की अवधि में ब्रिटिश शासन द्वारा प्रवासी मारवाड़ियों को मतदान के अधिकार से वंचित करने के प्रयास के विरोध से प्रारम्भ कर सामाजिक रूढियों एवं कुरीतियों यथा पर्दा-प्रथा, कन्या-विवाह, बाल-विवाह आदि के उन्मूलन; स्त्री-कन्या शिक्षा एवं विधवा-विवाह को बढ़ावा, आदि विभिन्न सामाजिक विषयों पर सम्मेलन ने समाज को नेतृत्व प्रदान किया है और महत्वपूर्ण सफलताएँ अर्जित की हैं।

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद राष्ट्र-निर्माण, विषेशकर व्यवसाय-वाणिज्य के क्षेत्र में, मारवाड़ी समाज ने अग्रणी भूमिका निभाई। मात्र परिश्रम और ईमानदारी की पूँजी के साथ राष्ट्र के सभी भागों में जाकर मारवाड़ियों ने भारत की आर्थिक प्रगति में अतुलनीय योगदान दिया। वे अगम्य स्थानों पर भी गये - 'जहाँ न जाये बैलगाड़ी, वहाँ पहुँचे मारवाड़ी' और व्यापार में इन्होंने ऐसी साख बनाई कि 'न खाता न बही, जो मारवाड़ी कहे वही सही' जैसी उक्तियाँ बनीं। बदलते समय के साथ मारवाड़ी युवक-युवतियाँ अपने परम्परागत क्षेत्रों के अतिरिक्त उच्च प्रषासनिक सेवाओं, वकालत, चिकित्सा, सी. ए., कला-साहित्य-विज्ञान, सेना-पुलिस, खेलों सहित विभिन्न क्षेत्रों में आगे आये हैं और अपना परचम लहराया है।

समयांतर में परिस्थितियाँ बदली हैं और उनके साथ-साथ समस्याएँ भी। समाज सुधार के क्षेत्र में धार्मिक-सामाजिक-वैवाहिक आयोजनों में आडम्बर-फिजूलखर्ची पर नियंत्रण, वैवाहिक समारोहों में मद्यपान एवं सड़कों पर भौंडे नाच-गान तथा प्री-वेडिंग शूट का निषेध, आज हमारे लिए आवश्यक हैं। मारवाड़ी समाज ने पूरे देश को, तथा विदेशों में भी, अपना कार्य क्षेत्र बनाया है, यह गर्व का विषय है। तथापि बीच-बीच में हमें संकीर्णता का सामना करना पड़ता है। समाज पर किसी समस्या या आक्षेप की स्थिति में सम्मेलन सदैव सतर्क रहा है तथा तत्काल कार्यवाही की है। इससे निपटने में समरसता की महती भूमिका है।

हम जहाँ रहते हैं, वहाँ के लोगों से सामंजस्य कर एक साझी संस्कृति खड़ी की जा सकती है। सम्मेलन ने अपने स्थापना काल से ही नारी शिक्षा एवं कन्या शिक्षा को प्रबल समर्थन दिया है। सम्मेलन की प्रादेशिक शाखाएं अपने स्तर पर स्नातक स्तर तक की शिक्षा में सहयोग करती हैं। केन्द्रीय सम्मेलन समाज के मेधावी एवं जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को उच्च एवं तकनीकी षिक्षा हेतु अनुदान देता है। अब तक करीब दो करोड़ रुपयों की राषि देष के विभिन्न भागों के छात्र-छात्राओं को अनुदान के रूप में दी जा चुकी है। हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि समाज की कोई मेधावी छात्र-छात्रा संसाधनों के अभाव में शिक्षा से वंचित न रह जाये।

समाज के बेरोजगार युवक-युवतियों को रोजगार पाने में सहायता के लिए भी सम्मेलन रोजगार सहायता का कार्यक्रम भी चलाता है। केन्द्रीय सम्मेलन एवं कई प्रादेषिक शाखाओं के भी इसके लिए अपने-अपने कार्यक्रम हैं और सभी अपने-अपने स्तर पर प्रयास करते हैं। समाज के कमजोर तबके के लोगों हेतु चिकित्सा की समुचित व्यवस्था की कमी एक ज्वलंत विषय है। स्थिति और भी दयनीय हो जाती है जब कोई गरीब व्यक्ति किसी असाध्य रोग से ग्रसित हो जाता है।

सम्मेलन, उच्चतम स्तर पर विचार-विमर्श कर, इस दिशा में भी शीघ्र ही समुचित कदम उठाने का इच्छुक

हार्दिक शुभकामनाओं सहित...